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Babaji’s Masterkey to All Ills (Kriya) - Hindi

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बाबाजी की वाणी

क्रिया योग पर एक ग्रन्थत्र


पुस्तक-१


रहस्यवाद का प्रकटीकरण


'बाबाजी की वाणी व रहस्यवाद का प्रकटीकरण', 'बाबाजी द्वारा कथित सभी बुराईयों की सर्वकुन्जी क्रिया' और 'मृत्यु की मृत्यु (क्रिया)', जिनका हिंदी अनुवाद तीन अलग अलग पुस्तकों में प्रकाशित किया जा रहा है, जिनमें संसार के महानतम व जीवित आध्यात्मिक गुरु के गहनतम व महत्वपूर्ण कथन सम्मिलित हैं।

इनके लेखक सद्गुरु बाबाजी नागराज, ने यह भविष्यवाणी की थी कि ये पुस्तकें अन्तत: क्रिया योग के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए प्रेरणा व प्रोत्साहन का एक प्रभावशाली स्रोत सिद्ध होंगी: यह उद्देश्य है विविधता में एकता, विश्व शांति व ईश्वरानुभूति। ये रचनाएँ एक रत्न के समान हैं जो उन सबको प्रेरणा प्रदान करेंगी जो एक उन्नत जीवन जीने की अभिलाषा रखते हैं।

सन् 1952 एवं 1953 के दौरान, बाबाजी रात्रि के समय अपने "परम प्रिय पुत्र", एक रहस्यवादी एवं आदरणीय पत्रकार वी.टी. नीलकांतन के भारत के तमिलनाडु प्रान्त के एग्मोर में स्थित गृह में प्रकट हुआ करते थे। बाबाजी चाहते थे कि उनके शिष्य नीलकांतन और उसके "द्वितीयार्द्ध" (बाबाजी के प्रिय पुत्र) श्री ऐस.ए.ए. रमैया: क्रिया योग आंदोलन में एक नवीन अध्याय का प्रारम्भ करने के लिए उनकी शिक्षाओं को लिपिबद्ध करें। उन्होंने कहा था कि इन पुस्तकों के प्रकाशन द्वारा, उनका क्रिया योग विश्व के कोने-कोने में प्रसारित हो जायगा। बाबाजी ने इन तीन पुस्तकों को, वी.टी. नीलकांतन को लिखवाया तथा उसने उनको शब्दश: लिपिबद्ध किया।

ये पुस्तकें पाठक को शाश्वत सत्यों को व्यवहारिक रूप में अपनाने में और बाबाजी क्रिया योग को, जो परिपूर्ण रूप में ईश्वरीय परम सत्य की प्राप्ति की वैज्ञानिक कला है, सीखने में प्रेरणा देंगी।


by V.T.Neelakantan, S.A.A. Ramaiah and Babaji Nagaraj

Sri V.T. Neelakantan recorded verbatim a series of talks given by Satguru Kriya Babaji in 1953. These are a fountain of delight and inspiration, illuminating the Kriya Yoga path towards God realization, unity in diversity and universal love. They also reveal the magnetic personality of Babaji and how he supports us all, with much humour and wisdom. They were originally printed in three volumes: "The Voice of Babaji and Mysticism Unlocked," "Babaji's Masterkey to All Ills, (Kriya)" and "Babaji's Death of Death (Kriya)." Includes the fascinating accounts of the meetings with Babaji in Madras and in the Himalayas by authors V.T. Neelakantan and Yogi S.A.A. Ramaiah. Out of print for nearly 50 years, they are profound and important statements from one of the world's greatest living spiritual masters.

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